tag:blogger.com,1999:blog-13130668.post111719280099466161..comments2007-04-18T00:13:48.393-07:00Comments on छाया: छायाराजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-13130668.post-1126436366164702822005-09-11T03:59:00.000-07:002005-09-11T03:59:00.000-07:00प्रियवर,"ब्लाग" लिखने के , कुछ अपने फायदे और नुकसा...प्रियवर,<BR/>"ब्लाग" लिखने के , कुछ अपने फायदे और नुकसान होते हैं। सबसे बड़ा फायदा तो यह होता है कि यह अनभिव्यक्ति की पीड़ा को हर लेता है और , आप का लेखन , भले ही किसी पत्र-पत्रिका में न प्रकाशित हो , दूसरों तक पहुँचता है । <BR/>दूसरी , सबसे बड़ी मौज जो है , कि लेखक-पाठक के बीच के बीच संवादहीनता का अन्तराल मिट जाता है ।<BR/>इसलिये , जब आपने , अपनी टिप्पणी "क्या कहूँ" से प्रारम्भ की , तो हमें ऐसा लगा , कि , कोई पाठक , मेरी किसी कृति से अनावश्यक ही व्यथित हो गया है। पर , फिर भी आपने अपनी बातें रखी।<BR/><BR/>जो बात मुझे आश्चर्यचकित करती है , कि जिस लेख की बात आपने की है , वह लेख , मेरा कम्प्यूटर , कम से कम , मुझे अपने इस ब्लाग "छाया" पर नहीं दिखा रहा है । इसलिये , मैं इसमें कोई संशोधन नहीं कर पा रहा । मेरे ये दोनों लेख मेरे दूसरे ब्लाग "अभिप्राय" पर भी प्रकाशित हैं , जहाँ "अज्ञेय" के नाम को मैंने संशोधित कर दिया है। "छाया" पर चूँकि , यह लेख ही नहीं दिख रहा है , इसलिये संशोधन संभव नहीं है।<BR/><BR/>दूसरी बात , कविता को ले कर । तो , मैं आप का आभार महसूस करूँगा , यदि इन पंक्तियों का विशुद्ध रूप , आप मुझे उपलब्ध करा सकें । क्योंकि , मैंने यह पंक्तियाँ , लगभग २० वर्षों पहले पढ़ी थीं । इसलिये मुमकिन है , शब्दों का क्रम मुझे , ठीक तौर से याद न हो । लेकिन , जहाँ तक बन पड़ा , मैंने मूलभावों को अक्षुण्ण रूप में रखने की कोशिश की । <BR/><BR/>बहरहाल , त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराने के लिये मैं आभारी हूँ ।<BR/><BR/>-राजेश <BR/>(सुमात्रा)राजेश कुमार सिंहhttp://www.blogger.com/profile/07513885073414867392noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13130668.post-1126429699285849412005-09-11T02:08:00.000-07:002005-09-11T02:08:00.000-07:00राजेश,क्या कहूं,बिरादर अज्ञेय का नाम तुमने गलत लि...राजेश,<BR/>क्या कहूं,<BR/>बिरादर अज्ञेय का नाम तुमने गलत लिखा है। चलो भला नाम में क्या रखा है पर उससे भी गलत बात तुमने कविता भी गलत लिखी है। एसा न करो । जानकारी अच्छी है<BR/>मसिजीवीmasijeevihttp://www.blogger.com/profile/07021246043298418662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13130668.post-1117833805673269772005-06-03T14:23:00.000-07:002005-06-03T14:23:00.000-07:00बढिया लिखा है, काफी जानकारी दी है | अगले अंक का इं...बढिया लिखा है, काफी जानकारी दी है | अगले अंक का इंतजार है |Vipin Srivastavahttp://www.blogger.com/profile/13117205985025265933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13130668.post-1117293614271585812005-05-28T08:20:00.000-07:002005-05-28T08:20:00.000-07:00बढ़िया लिखा है ।बधाई।बढ़िया लिखा है ।बधाई।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com